2 हेडमास्टर की पत्नी ने नौकर के साथ लिया ऐसा फैसला, बदल गई पूरे परिवार की जिंदगी
भाग 2: जिस फैसले ने रिश्तों की नई शुरुआत कर दी
अनुज के माता-पिता के भोपाल आने के बाद उनके जीवन में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा। अब उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता पहले जैसी नहीं थी।
रीना अक्सर अनुज की मां से मिलने जाती और उनकी जरूरतों के बारे में पूछती। दूसरी ओर रविचंद्र भी अनुज के पिता से स्कूल और गांव के जीवन को लेकर बातचीत करते।
लेकिन इस नए रिश्ते को लेकर हर कोई खुश नहीं था।
रविचंद्र के स्कूल में कुछ लोगों को जब पता चला कि उन्होंने अपने घर में काम करने वाले युवक को परिवार के सदस्य की तरह अपनाया है, तो तरह-तरह की बातें होने लगीं।
किसी ने कहा कि अनुज जरूर किसी संपत्ति की उम्मीद कर रहा होगा।
किसी ने रीना के फैसले पर सवाल उठाया।
अनुज को जब इन बातों का पता चला तो उसने रीना से कहा,
“अगर मेरी वजह से आपको या परिवार को परेशानी हो रही है तो मैं वापस अपने गांव चला जाऊंगा।”
रीना ने उसकी बात सुनकर कहा,
“तुम्हें यहां इसलिए नहीं रखा गया था कि तुम हमारे लिए काम करो। तुम्हें इसलिए अपने करीब रखा क्योंकि हमने तुम्हारे अंदर ईमानदारी और जिम्मेदारी देखी है। दूसरों की बातों से रिश्ते तय नहीं होते।”
अनुज की आंखें भर आईं।
लेकिन उसी रात एक और घटना हुई।
रविचंद्र को अचानक स्कूल से फोन आया। स्कूल के जरूरी दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी।
वह देर रात तक स्कूल में रुके रहे।
घर लौटने पर उन्होंने देखा कि अनुज जाग रहा था।
अनुज ने पूछा, “सर, सब ठीक है?”
रविचंद्र ने कहा, “कुछ जरूरी कागजों को लेकर परेशानी है। कल जांच होने वाली है।”
अनुज ने बिना कुछ पूछे कहा,
“अगर कोई काम हो तो बताइए। मैं मदद कर दूंगा।”
अगली सुबह अनुज ने घर के काम जल्दी खत्म किए और रविचंद्र के साथ स्कूल चला गया।
वहां उसने देखा कि कई पुराने रिकॉर्ड बिखरे हुए थे। अनुज ने अपनी सामान्य समझ और सावधानी से दस्तावेजों को व्यवस्थित करने में मदद की।
जांच के दौरान पता चला कि गलती रविचंद्र की नहीं थी। एक पुराने रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज हो गई थी।
रविचंद्र को राहत मिली।
उन्होंने अनुज की ओर देखकर कहा,
“आज तुमने मेरी बहुत मदद की।”

अनुज मुस्कुराकर बोला,
“आपने मेरे परिवार का साथ दिया है। मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकता क्या?”
यह सुनकर रविचंद्र कुछ क्षणों तक चुप रहे।
उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अनुज के साथ बनाया गया रिश्ता केवल दया पर आधारित नहीं था। यह धीरे-धीरे आपसी सम्मान और विश्वास में बदल चुका था।
लेकिन कहानी में अभी एक और मोड़ बाकी था।
कुछ दिनों बाद रविचंद्र की तबीयत अचानक खराब हो गई। डॉक्टर ने उन्हें कुछ समय आराम करने की सलाह दी।
अब घर और स्कूल से जुड़ी कई जिम्मेदारियां रीना पर आ गईं।
अनुज ने बिना किसी शिकायत के परिवार की मदद शुरू कर दी। उसने रविचंद्र की दवाइयों का ध्यान रखा, उनके पिता से बात की और रीना का काम भी हल्का किया।
इस दौरान रीना ने एक बड़ा फैसला लिया।
उसने अनुज से कहा,
“तुम्हारी बहन की पढ़ाई बीच में नहीं रुकनी चाहिए। उसकी आगे की पढ़ाई का खर्च हम उठाएंगे।”
अनुज ने तुरंत मना कर दिया।
“नहीं मैडम, आपने मेरे परिवार के लिए पहले ही बहुत किया है।”
रीना ने मुस्कुराकर कहा,
“इसे एहसान मत समझो। इसे परिवार की जिम्मेदारी समझो।”
अनुज कुछ नहीं बोल पाया।
उस दिन उसने महसूस किया कि जिंदगी में कभी-कभी अनजान लोग भी ऐसे रिश्ते दे जाते हैं, जिनकी उम्मीद अपने लोगों से भी नहीं होती।
लेकिन इसी बीच गांव से एक खबर आई जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया।
अनुज की छोटी बहन की पढ़ाई से जुड़ा एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया था।
अनुज तुरंत गांव जाने की तैयारी करने लगा।
रविचंद्र ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
“इस बार तुम अकेले नहीं जाओगे। हम भी तुम्हारे साथ चलेंगे।”
अनुज ने उनकी ओर देखा।
उसे पहली बार लगा कि अब वह अपने परिवार की समस्याओं से अकेले नहीं लड़ रहा।
लेकिन गांव पहुंचने के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने रीना और रविचंद्र दोनों को हैरान कर दिया।
अनुज की बहन ने बताया कि उसके परिवार से जुड़ी एक पुरानी जमीन का विवाद फिर से सामने आ गया था।
और उस विवाद में जिस व्यक्ति का नाम सामने आया था, उसे देखकर अनुज के चेहरे का रंग उड़ गया।
वह व्यक्ति रविचंद्र का पुराना परिचित था।
अब सवाल सिर्फ अनुज के परिवार का नहीं था।
यह मामला रविचंद्र के अतीत से भी जुड़ चुका था।