विधवा महिला बच्चा समझ रही थी
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सागर दुकान: एक लड़की का दिल और एक जवान का रिश्ता
दोस्तों, आज की कहानी की शुरुआत होती है सूरत से, जहाँ पर रहती थी मोहिनी। वह एक विधवा महिला थी, जो अपने पति की मृत्यु के बाद अपने ही पति की साड़ियों का बहुत बड़ा काम सँभालती थी। वही काम उसने फिर से शुरू कर दिया था। सूरत में उसकी दो मंजिला दुकान थी, जो बहुत अच्छी चल रही थी और जहाँ अक्सर वर्कर्स की ज़रूरत रहती थी।
अब मोहिनी को अपने पति की मृत्यु के बाद एक बहुत बुरी लत लग जाती है। उसे नए-नए लड़कों का शौक हो जाता है। मोहिनी को अपनी रातें रंगीन करने के लिए रोज़ ही एक लड़का चाहिए होता था। और इस शौक को पूरा करने के लिए वह लड़कों को कहीं बाहर से लेकर आती। कभी-कभी तो वह दुकान के वर्कर के साथ ही अपनी ज़रूरत पूरी कर लेती थी।

अब दोस्तों, ऐसा इसलिए था क्योंकि वह अपनी ही दुकान में काम करने वाले लड़कों को अपने पास बुला लेती थी। मोहिनी की दुकान का नाम ‘सागर’ था, जो उसके पति के नाम पर थी। दुकान इतनी ज़्यादा मशहूर थी कि कोई भी वहाँ पर काम करने के लिए तैयार हो जाता था। जो भी लड़का वहाँ काम करने के लिए आता था, मोहिनी पहले उसका इंटरव्यू लेती थी, क्योंकि उसका असल मक़सद तो अपनी प्यास बुझाना होता था।
अब मोहिनी इतनी ज़्यादा खूबसूरत थी दोस्तों, कि कोई भी उसके साथ काम करने के लिए तैयार हो जाता। यही कारण था कि मोहिनी की दुकान पर अक्सर भीड़ लगी रहती थी। मोहिनी के शरीर की बनावट ही इतनी खूबसूरत थी; उसका एक-एक अंग भरा हुआ था। अब क्या कहना! जो भी उसको देखता था, वह एक बार पलट कर ज़रूर देखता और सोचने लगता था, “काश ये मुझे एक बार मिल जाए।”
अपने शरीर की खूबसूरती के कारण वह लोगों को अपने साथ सब कुछ करने के लिए आकर्षित कर लेती थी। मोहिनी के अंदर एक खासियत थी कि वह किसी भी लड़के को ज़्यादा दिनों तक अपने पास नहीं रखती थी। इसका भी एक कारण था—जो लड़का मोहिनी को खुश कर देता था, वह उसे रख लेती थी, और जो उसे खुश नहीं कर पाता था, उसे वह निकाल देती थी।
इसी वजह से उसके वहाँ ज़्यादा दिनों तक कोई भी लड़का टिक नहीं पाता था। मोहिनी ज़्यादातर खुले पल्लू की साड़ी पहनती थी और ब्लाउज़ फैशनेबल पहनती थी, जिससे उसका आधा अंग दिखता रहता था। वह ऐसे कपड़े इसलिए पहनती थी ताकि लोग उसे देखें और आकर्षित हों। जो भी उस पर आकर्षित हो जाता, उससे वह अपनी ज़रूरतें पूरी कर लेती थी। अगर लड़के उसके मुताबिक काम नहीं करते थे, तो वह उन्हें मारती थी और निकाल देती थी। यह सिलसिला चलता रहता है, लेकिन मोहिनी को अभी तक ऐसा कोई लड़का नहीं मिल रहा था जो उसके मन मुताबिक हो और उसकी ख्वाहिशों को पूरी तरह से संतुष्ट कर सके।
इसी तरह से समय बीतता है, 22 फ़रवरी 2025 का समय था और लड़कों की ज़रूरत बढ़ जाती है क्योंकि उस समय दुकान पर भीड़ ज़्यादा थी। उसी बीच एक लड़का दुकान पर अपना रेज़्यूमे लेकर आता है, जिसका नाम दीपक होता है। दीपक अभी 12वीं क्लास में पढ़ रहा था। वह बहुत ही गरीब परिवार से था, जिसके पिता की मृत्यु हाल ही में हो गई थी। उसके घर में उसकी माँ और तीन बहनें भी थीं, जिनकी ज़िम्मेदारी अब उसके कंधों पर आ गई थी।
दीपक की उम्र लगभग 20 से 21 वर्ष के आसपास थी। दीपक जब अपना रेज़्यूमे लेकर मोहिनी के पास पहुँचता है, तो मोहिनी एक पल के लिए दीपक को देखती ही रह जाती है, क्योंकि दीपक बहुत ही हट्टा-कट्टा और हैंडसम लड़का था। उसके शरीर की बनावट गठीली थी, एकदम वैसा ही लड़का, जैसा मोहिनी चाह रही थी।
मोहिनी को देखकर दीपक भी देखता ही रह जाता है, क्योंकि मोहिनी बेहद खूबसूरत थी। दीपक उसकी तरफ आकर्षित हो जाता है। मोहिनी, दीपक को अपने केबिन में बैठा देती है और लगभग 10 मिनट के बाद केबिन में जाकर कहती है, “तुम कल से काम पर आना। तुम्हारी नौकरी पक्की हो गई।”
यह सुनते ही दीपक बहुत खुश हो जाता है। (तो दोस्तों, आगे हम इस कहानी में जानेंगे कि आखिरकार ऐसा क्या होता है, जिससे दीपक और मोहिनी की ज़िंदगी बर्बाद हो जाती है। दोस्तों, पूरी कहानी जानने के लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लें और वीडियो को लाइक कर लें। जिन्होंने अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है, प्लीज़ सब्सक्राइब कर लीजिए और आप हमारा वीडियो कहाँ से देख रहे हैं, कमेंट करके ज़रूर बताएं। चलिए बिना टाइम गवाए कहानी में आगे बढ़ते हैं।)
अब मोहिनी, दीपक के सामने एक शर्त रख देती है, “तुम्हारे सामने मैं एक शर्त रखूँगी। तुम्हें अब मेरे साथ ही रहना होगा। मतलब तुम दिन भर दुकान में काम करोगे और रात में मेरे साथ रहना होगा। वहीं रुकना पड़ेगा। मैं घर पर अकेली रहती हूँ और मुझे तुम्हारे जैसे लड़के की ज़रूरत है।”
दीपक यह सोचने लगता है, “जैसे मैं अपने घर पर सोने जाऊँगा, वैसे ही मैडम के यहाँ सो जाऊँगा। इसमें कौन सी बड़ी बात है?” तो दीपक मोहिनी से ‘कल आऊँगा’ बोल कर चला जाता है। दीपक यह नहीं जानता था कि आगे उसके साथ क्या होने वाला है। दीपक जब घर पहुँचता है, तो अपनी माँ को बताता है, “माँ, मुझे एक साड़ी की दुकान में काम मिल गया है और मैं कल से वहीं पर रुकूँगा मैडम के पास। उन्होंने यह शर्त रखी है कि जो भी वर्कर वहाँ आता है, उसे रात में वहीं रुकना पड़ता है। इसलिए मैं वहीं काम वगैरह करके तभी वापस आऊँगा।”
उसकी माँ यह सुनकर थोड़ी दुखी हो जाती है और कहती है, “तुम वहाँ रहकर अपना ख्याल नहीं रख पाओगे बेटे। और काम में कोई गलती मत करना।” माँ अपने बेटे को समझाती है और सब लोग खाना खाकर सोने चले जाते हैं।
दीपक अपना सारा सामान पैक कर लेता है और अगली सुबह अपनी माँ के पैर छूकर सारा सामान लेकर दुकान की ओर निकल पड़ता है। दिन भर वह दुकान पर खूब मेहनत से काम करता है। मोहिनी यह देख रही होती है कि वह कितनी लगन से काम कर रहा है। जैसे ही शाम होती है, मोहिनी दीपक से कहती है, “घर चलने का समय हो गया है। चलो जाकर गाड़ी में बैठ जाओ।”
दीपक जाकर गाड़ी के पीछे वाली सीट पर बैठ जाता है। मोहिनी गाड़ी के पास आती है और कहती है, “पीछे क्यों बैठे हो? आगे बैठो।” दीपक शरमाते हुए आगे बैठ जाता है। गाड़ी स्टार्ट होती है और मोहिनी दीपक को लेकर घर की तरफ चल देती है। रास्ते में एक शराब की दुकान पड़ती है, क्योंकि मोहिनी को पीने का शौक था। मोहिनी वहाँ गाड़ी रोक देती है और दीपक को एक पर्ची पर नाम लिख कर देती है कि कौन सी बोतल लानी है। वह कहती है, “दुकान पर जाओ और पर्ची में जो लिखा है वो लेकर आओ।”
दीपक गाड़ी से उतरता है, दुकान पर जाकर पर्ची दिखाता है और बोतल लेकर वापस गाड़ी में आकर बैठ जाता है। फिर गाड़ी आगे बढ़ जाती है।
अब मोहिनी अपने घर के सामने गाड़ी रोक देती है। जब दीपक गाड़ी से उतरता है, तो देखता है कि सामने एक बहुत बड़ा आलीशान मकान बना हुआ है। मोहिनी उतरकर अपने घर की तरफ चल देती है। चाबियाँ मोहिनी के पास ही थीं क्योंकि वह घर पर अकेली रहती थी। ताला खोलकर जब मोहिनी अंदर एंट्री करती है, तो दीपक अंदर का नज़ारा देखकर दंग रह जाता है। उसने पहले कभी इतना खूबसूरत घर नहीं देखा था।
थोड़ी देर बाद मोहिनी सारे घर की लाइट्स और एसी वगैरह ऑन कर देती है। लाइट की चकाचौंध देखकर दीपक चारों तरफ सिर घुमाकर देखने लगता है, “भैया, यह तो बहुत चमक रहा है यार।”
दीपक अपनी मैडम से कहता है, “मैडम आपका घर तो बहुत ही अच्छा है। महल जैसा है। बहुत ही सुंदर है। आप कैसे यहाँ अकेली रहती हैं?” मोहिनी मुस्कुरा कर कहती है, “सिर्फ मेरा घर ही सुंदर है? मैं सुंदर नहीं हूँ क्या?” दीपक झिझकते हुए कहता है, “नहीं मैडम, आप तो बिल्कुल एकदम कमाल हो। बहुत खूबसूरत हो। आपके जैसी तो कोई नहीं है।”
यह बात मोहिनी को बहुत अच्छी लगती है। वह कहती है, “तुम यहाँ सोफे पर बैठ जाओ। मैं थोड़ा फ्रेश होकर आती हूँ।” वह एसी तेज़ करके फ्रेश होने चली जाती है।
जब वह नहा-धोकर अपने कमरे से बाहर हॉल में आती है, तो उसने बहुत ही हल्के कपड़े, यानी एक ब्लैक कलर की पारदर्शी नाइटी पहनी हुई होती है। उसे तो दीपक को रिझाना था। ब्लैक कलर की नाइटी में मोहिनी की खूबसूरती कहर ढा रही थी। जैसे ही दीपक की नज़र उस पर पड़ती है, वह उसे देखता ही रह जाता है। मोहिनी जानबूझकर ऐसे कपड़े पहन कर आई थी ताकि दीपक को कुछ कहना न पड़े, वह उसे देखते ही सब कुछ समझ जाए और खुद ही शुरुआत कर दे।
मोहिनी आकर दीपक के पास सोफे पर बैठ जाती है। बैठने के बाद वह जानबूझकर कुछ उठाने के बहाने नीचे झुकने का नाटक करती है। जब वह नीचे झुकती है, तो ज़ाहिर सी बात है कि उसके जिस्म के अंग दीपक को साफ़ दिखने लगते हैं। वह झुकी ही इसलिए थी ताकि दीपक उसे देख सके।
दीपक जब उसके अंगों को देखता है, तो वह और भी ज़्यादा बेचैन हो जाता है। मोहिनी उठकर बैठती है और पूछती है, “क्या देख रहे हो?” दीपक थोड़ा सा चौंक जाता है और हकलाते हुए कहता है, “मैडम… कुछ नहीं, मैं तो ऐसे ही देख रहा था… कुछ नहीं।” मोहिनी मुस्कुराती है, “मुझे पता है तुम क्या देख रहे हो बेटा।”
उसके बाद वह उससे कहती है, “जाओ, जो बोतल लेकर आए थे, उसे खोलो।” दीपक जाकर बोतल लाता है और मोहिनी पेग बनाने लगती है। मोहिनी पूछती है, “क्या तुम नहीं पीते हो?” दीपक कहता है, “नहीं मैडम, मैंने आज तक नहीं पी है और न ही मैं पी पाऊँगा।”
लेकिन मोहिनी ज़बरदस्ती उसे पिलाने पर अड़ जाती है, “दो गिलास बनाओ और मेरी सारी शर्तें तुम्हें माननी पड़ेंगी। अब एक बात मैं तुम्हें बता दूँ… अगर तुम मुझे खुश रखोगे तो यह नौकरी तुम्हारी पक्की रहेगी। अगर तुमने मुझे खुश नहीं किया और मुझे बीच में अधूरा छोड़ दिया, तो तुम्हारी नौकरी चली जाएगी।”
यह सुनकर कि उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है, दीपक बहुत ज़्यादा परेशान हो जाता है…