मुझे दादाजी की कब्र के पास ही दफनाना” सायद ऑस्ट्रेलिया से जिंदा वापस न लौटूं | उसे सब पता था!
“मुझे दादाजी की क/ब्र के पास ही द/फनाना” – ऑस्ट्रेलिया से केरल तक फैली एक धो/खे की खौ/फनाक दास्तान
म/रने से कुछ ही दिन पहले सैम अब्राहम ने अपने पिता से एक बहुत अजीब और डरावनी बात कही थी। उसने कहा था, “मुझे बहुत डर लग रहा है। शायद मैं इस बार ऑस्ट्रेलिया से जिंदा वापस न लौटूँ… और अगर मुझे कुछ हो जाए, तो मुझे मेरे दादाजी की क/ब्र के पास ही द/फनाना।”
उस समय परिवार में किसी ने भी सैम की इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। सबको लगा कि वह यात्रा की थकावट या मानसिक तनाव के कारण ऐसा सोच रहा है। लेकिन इस बातचीत के महज कुछ ही दिनों बाद, सैम का म/ृत दे/ह एक ता/बूत में बंद होकर ऑस्ट्रेलिया से वापस केरल पहुँचा।
संपन्न परिवार का होनहार बेटा
सैम अब्राहम का जन्म केरल के कोल्लम जिले के एक प्रतिष्ठित और संपन्न ईसाई परिवार में हुआ था। सैम बचपन से ही बहुत समझदार, शांत स्वभाव का और होनहार लड़का था। संगीत में उसकी खास रुचि थी।
साल 2008 में उसकी शादी सोफिया नाम की लड़की से हुई थी। सोफिया दिखने में जितनी सुंदर थी, व्यवहार में भी उतनी ही सुशील और सभ्य नजर आती थी। दोनों का एक 7 साल का प्यारा सा बेटा भी था। सैम अपनी पत्नी सोफिया और बेटे के साथ मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) में रहता था और वहाँ ‘यूएई एक्सचेंज’ (UAE Exchange) नाम की कंपनी में काम करता था।
सैम की यह दिनचर्या थी कि वह हर साल छुट्टियों में अपने परिवार से मिलने केरल आया करता था। अक्टूबर 2015 में भी सैम अपनी पत्नी सोफिया और अपने 7 साल के बेटे के साथ केरल अपने गाँव आया। लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक अजीब सा साया था।
पिता से कही वो खौ/फनाक बात
छुट्टियों के दौरान एक दिन सैम ने अपने पिता सैमुअल से अपने दिल का डर साझा किया। उसने कहा कि उसे अंदर से ऐसा अहसास हो रहा है कि वह इस बार ऑस्ट्रेलिया से वापस जीवित नहीं लौटेगा। उसने अपने पिता से यह अंतिम इच्छा भी जताई कि अगर उसके साथ कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसे उसके दादाजी की क/ब्र के पास ही जगह दी जाए।
पिता सैमुअल यह सब सुनकर बहुत बेचैन हुए, लेकिन उन्होंने इसे केवल सैम का वहम मानकर टाल दिया। छुट्टियाँ खत्म हुईं और 11 अक्टूबर 2015 को सैम अपने परिवार के साथ मेलबर्न वापस लौट गया। पिता सैमुअल को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह उनके बेटे के साथ उनकी अंतिम मुलाकात थी।
मेलबर्न पहुँचने के ठीक तीन दिन बाद, यानी 14 अक्टूबर 2015 की सुबह, केरल में सैम के घर एक फोन आया—सैम अब्राहम की म/ौत हो चुकी थी। जैसा सैम ने कहा था, उसका दे/ह ता/बूत में बंद होकर वापस केरल लाया गया और उसकी इच्छा के अनुसार दादाजी की क/ब्र के बगल में उसे द/फना दिया गया।
सैम की म/ौत का कारण ‘हार्ट अटैक’ (दिल का दौरा) बताया गया था। परिवार गमगीन था, माँ-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन कुदरत का भाणा मानकर सब चुप थे।
10 महीने बाद आया वो चौंकाने वाला फोन
सैम के द/फन के बाद सोफिया अपने बेटे और अपनी बहन सोनिया के साथ वापस मेलबर्न चली गई। वह अक्सर ऑस्ट्रेलिया से सैम के बूढ़े माता-पिता को फोन किया करती थी, उनका हाल-चाल पूछती थी और हर रविवार नियम से बात करती थी। बूढ़े माँ-बाप के लिए सोफिया और उनका पोता ही सैम की आखिरी निशानी थे।
लेकिन जुलाई 2016 के बाद सोफिया के फोन अचानक बंद हो गए। एक रविवार बीता, दो रविवार बीते, कोई कॉल नहीं आया।
फिर आया 12 अगस्त 2016 का वो दिन। ऑस्ट्रेलिया पुलिस का फोन सीधे सैम के पिता सैमुअल के पास पहुँचा। पुलिस ने जो कहा, उसने सैमुअल के होश उड़ा दिए।
ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने बताया: “आपके बेटे सैम की म/ौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई थी, बल्कि उसकी साजिश के तहत ह/त्या की गई थी। और इस ह/त्या के जुर्म में हमने आपकी बहू सोफिया को गिर/फ्तार कर लिया है।”
यह सुनते ही केरल में सैम के परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस बहु को वे बेकसूर समझ रहे थे, वही उनके बेटे की ह/त्या/रिन निकली।
बचपन की दोस्ती से खौ/फनाक साजिश तक
इस पूरी खौ/फनाक कहानी की शुरुआत वर्षों पहले केरल में ही हो चुकी थी। सैम और सोफिया बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों बेथल मार्थोमा चर्च के म्यूजिक ग्रुप में साथ गाते थे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हुई। जब सैम ने सोफिया को अपने पिता से मिलवाया था, तब सैम के पिता सैमुअल को पहली ही नज़र में सोफिया का स्वभाव सही नहीं लगा था। लेकिन सैम की माँ ने इसे बच्चों का लगाव मानकर बात टाल दी थी।
साल 2003 में सैम पढ़ाई के लिए डिंडीगुल (तमिलनाडु) चला गया, जबकि सोफिया ने महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन लिया।
इसी कॉलेज में सोफिया की मुलाकात अरुण कमलासन नाम के एक लड़के से हुई। धीरे-धीरे सोफिया और अरुण की दोस्ती गहरी होती गई और दोनों के बीच अ/वैध शा/रीरिक संबंध बन गए। सैम के साथ रिश्ते में रहते हुए भी सोफिया, अरुण के प्यार में पड़ चुकी थी। वह अक्सर अरुण के सामने सैम का मजाक उड़ाती थी और उसे ‘बोरिंग इंसान’ कहती थी।
मजबूरी की शादी और दुबारा अफेयर
2005 में कॉलेज खत्म होने के बाद अरुण नौकरी के सिलसिले में चला गया। सोफिया फिर से सैम के करीब आ गई। 2008 में जब सैम को ओमान में नौकरी मिली, तो उसने सोफिया को शादी के लिए प्रपोज किया।
सैम के पिता सैमुअल इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन सोफिया ने आत्म/हत्या करने की ध/मकी दी। डर के मारे सैम के पिता को शादी के लिए हाँ कहना पड़ा। दोनों की शादी हुई और एक साल बाद उनका एक बेटा हुआ।
सैम ओमान में काम कर रहा था और सोफिया बेंगलुरु में। बाहर से सब ठीक दिखता था, लेकिन सोफिया अरुण को नहीं भूली थी। कुछ समय बाद सोफिया ने फिर से अरुण से संपर्क किया और दोनों का एक्सट्रा मैरीटल अफेयर (अ/वैध संबंध) दोबारा शुरू हो गया।
मेलबर्न की योजना और विफल ह/मला
जब अरुण को पता चला कि उसे ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में नौकरी मिलने वाली है, तो सोफिया ने भी अपनी नर्स बहन की मदद से मेलबर्न में नौकरी ढूँढ ली और 2012 में मेलबर्न शिफ्ट हो गई।
सोफिया को लगता था कि सैम मेलबर्न नहीं आएगा, लेकिन सैम अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था और वह भी अपनी नौकरी बदलकर मेलबर्न पहुँच गया। सैम के वहाँ रहने से सोफिया और अरुण का मिलना मुश्किल होने लगा। सोफिया तलाक लेकर अलग हो सकती थी, लेकिन संपत्ति और अन्य फायदों के लालच में उसने और अरुण ने मिलकर सैम को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।
पहला प्रयास (जुलाई 2015): जुलाई 2015 में मेलबर्न के लालोर रेलवे स्टेशन के पास एक नकाबपोश आदमी ने सैम पर धार/दार ह/थियार से हा/तापाई के दौरान ह/मला कर दिया। सैम ने हिम्मत दिखाकर मुकाबला किया और ह/मलावर का नकाब खींच दिया। ह/मलावर कोई और नहीं, अरुण ही था! अपनी पहचान उजागर होते देख अरुण भाग गया। सैम डर गया था, इसलिए उसने पुलिस को चेहरे के बारे में सच नहीं बताया। यही वजह थी कि सैम ने केरल में अपने पिता से कहा था कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।
13-14 अक्टूबर की खौ/फनाक रात
जब सैम केरल से लौटकर 11 अक्टूबर को वापस मेलबर्न आया, तो सोफिया ने अरुण से कहा कि अब वह एक पल भी सैम के साथ नहीं रह सकती। दोनों ने सैम को ज़/हर देकर मा/रने की खौ/फनाक योजना बनाई।
अरुण ने कुछ गुप्त संपर्कों के जरिए अत्यधिक खतरनाक ज़/हर साइ/नाइड का इंतजाम किया।
13 अक्टूबर 2015 की रात:
- सोफिया ने घर पर सैम के लिए एवोकैडो मिल्क (दूध) बनाया, जिसमें उसने नींद की गोलियां मिला दीं।
- दूध पीते ही सैम बेसुध होकर सो गया।
- देर रात अरुण सोफिया के घर पहुँचा।
- सोफिया संतरे का जूस लेकर आई। दोनों ने उसमें भारी मात्रा में साइ/नाइड मिलाया।
- सैम बेहोश पड़ा था। अरुण चम्मच से धीरे-धीरे साइ/नाइड मिला हुआ जूस सैम के मुँह में डालता रहा ताकि वह उगल न दे।
सैम की म/ौत हो जाने के बाद भी वे दोनों उसके मुँह में ज़/हर डालते रहे। म/ौत की पुष्टि होने के बाद अरुण साक्ष्य मिटाकर चला गया और सोफिया अपने बेटे के साथ उसी बिस्तर पर सो गई जहाँ उसके पति का म/ृत शरीर पड़ा था।
अगली सुबह सोफिया ने रोने-धोने का ढोंग किया। उसने अपनी नर्स बहन और इमरजेंसी सेवा (911/000) को फोन किया और दिखाया कि सैम को दिल का दौरा पड़ा है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस का जाल
शुरुआत में इसे हार्ट अटैक माना गया, लेकिन जब फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. बर्ग ने सैम का पोस्टमार्टम किया, तो वे हैरान रह गए। सैम के लिवर और शरीर में 28 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम साइ/नाइड पाया गया। इंसानी जान लेने के लिए महज 1 मिलीग्राम ही काफी होता है।
डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया कि यह साफ तौर पर ह/त्या का मामला है।
विक्टोरियन पुलिस ने बड़ी चालाकी से काम लिया। उन्होंने ह/त्या की बात को गुप्त रखा और सोफिया व अरुण को यह यकीन होने दिया कि पुलिस इसे हार्ट अटैक ही मान रही है। बेफिक्र होकर सोफिया और अरुण खुलेआम मिलने लगे।
पुलिस ने अरुण के घर पर छापा मारकर उसका कंप्यूटर और हार्ड ड्राइव जब्त किया। उसमें सोफिया और अरुण की कई नि/जी तथा आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो मिलीं।
जांच में आगे खुलासा हुआ:
- वित्तीय लेन-देन: सोफिया ने वेस्टर्न यूनियन से अरुण के पते पर गुप्त रूप से पैसे भेजे थे।
- कॉल डिटेल्स: दोनों के बीच 6,000 से अधिक फोन कॉल्स और मैसेज का रिकॉर्ड मिला।
- सोफिया की डायरी: पुलिस को सोफिया की एक निजी डायरी मिली, जिसमें उसने अरुण के लिए लिखा था— “मुझे नहीं पता क्यों, पर तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो… काश तुम मुझे कसकर पकड़ लो, मैं पूरी तरह तुम्हारी हूँ।” एक जगह उसने लिखा था— “मैं इतनी क्रूर और चालाक क्यों हूँ? यू मेक मी सो बैड।”
अदालत का फैसला
सारे साक्ष्य और सबूत सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने सोफिया और अरुण कमलासन को गिर/फ्तार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ विक्टोरिया ने सुनवाई के दौरान इस अपराध को बेहद निंदनीय और क्रूर करार दिया:
- सोफिया को 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई (जिसमें 18 साल तक पैरोल का कोई प्रावधान नहीं)।
- अरुण कमलासन को 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई (बाद में अपील पर सजा घटाकर 24 साल कर दी गई)।
आज भी दोनों ऑस्ट्रेलिया की जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। सैम अब्राहम भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी दूरदर्शिता और अपने पिता से कही गई आख़िरी बात आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है।
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