चाची बोली आराम से डालो मगर – News

चाची बोली आराम से डालो मगर

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दर्दनाक दास्तान: “सिर्फ एक मांग और बिखर गया तूफानी का संसार”

दिल्ली के एक छोटे से किराए के फ्लैट में 30 वर्षीय सरोजिनी अपने पति तूफानी के साथ रहती थी। उनकी शादी को 4 साल हो चुके थे। तूफानी मूल रूप से बिहार का रहने वाला था और दिल्ली में फलों का थोक व्यापार करता था। व्यापार अच्छा चलने की वजह से घर में सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी। सरोजिनी घर संभालती, खाना बनाती और पति की सेवा करती थी।

लेकिन बाहर से खुशहाल दिखने वाले इस घर के अंदर एक गहरा सन्नाटा था। 4 साल बीत जाने के बाद भी उनकी कोई संतान नहीं थी। सरोजिनी अक्सर तूफानी से कहती, “हमें चार साल हो गए हैं, कोई औलाद नहीं हुई। क्या आप में कोई कमी है? डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते?”

तूफानी हमेशा अपनी पुरुषार्थ के झूठे गुरूर में बात टाल देता: “फालतू बातें मत करो, मैं बिल्कुल ठीक हूं।” लेकिन हकीकत यह थी कि तूफानी रात को काम से थककर आता और बिस्तर पर पड़ते ही सो जाता। वह न तो सरोजिनी को कोई प्यार देता, न करीब आता। सरोजिनी रात भर जागकर आंसू बहाती। जब उसने एक बार इस मुद्दे पर खुलकर बात करने की कोशिश की, तो तूफानी आगबबूला हो गया और उसने सरोजिनी पर हाथ उठा दिया। डर और शर्म के मारे सरोजिनी ने खामोशी अख्तियार कर ली।

कुछ समय बाद, तूफानी की पहली शादी से हुआ उसका बेटा रोहित—जो करीब 24-25 साल का था—उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आया। तूफानी ने खुशी-खुशी अपने बेटे को अपने साथ रख लिया।

रोहित जब घर आया, तो उसने अपनी सौतेली मां सरोजिनी को देखा। सरोजिनी बेहद सुंदर और शालीन थी। उसने रोहित का स्वागत किया और उसे एक कमरा दे दिया। सरोजिनी उसका पूरा ख्याल रखती, अच्छा खाना बनाती। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी।

अकेलेपन और उपेक्षा की शिकार सरोजिनी कई बार छत पर जाकर अपने हमउम्र पड़ोसी कमलेश से भी बातें करती और अपना दुख साझा करती। एक रात रोहित ने सरोजिनी को छत पर बात करते देखा। जब रोहित ने उससे इस बारे में पूछा, तो सरोजिनी अपने जज्बातों पर काबू न रख सकी। वह रो पड़ी और उसने रोहित के सामने अपना पूरा दर्द बयां कर दिया कि कैसे तूफानी उसे नजरअंदाज करता है और मारता-पीटता है।

रोहित का दिल पसीज गया। धीरे-धीरे सरोजिनी अपनी भावनात्मक और शारीरिक तन्हाई को मिटाने के लिए रोहित के करीब आने लगी। शुरुआत में रोहित ने इसका विरोध किया और कहा कि यह रिश्ता मर्यादा के खिलाफ है, लेकिन सरोजिनी की लगातार जिद और आंसुओं के आगे उसने घुटने टेक दिए। दोनों ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं और एक नाजायज रिश्ते में बंध गए। यह सिलसिला लगातार चलने लगा।

एक रात, तूफानी मंडी से अचानक समय से पहले घर लौट आया। उसने रोहित के कमरे से अजीब आवाजें सुनीं। जब उसने दरवाजा खोला, तो सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। तूफानी का खून खौल उठा। उसने रोहित को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

जब सरोजिनी बीच-बचाव करने आई, तो तूफानी का गुस्सा उस पर फूट पड़ा। उसने सरोजिनी को जोर से धक्का दिया और बुरी तरह पीटा। जमीन पर गिरने और गंभीर चोट लगने के कारण सरोजिनी के शरीर से भारी रक्तस्राव होने लगा और वह असहनीय दर्द से तड़पते हुए बेहोश हो गई।

हालत बिगड़ती देख तूफानी घबरा गया और तुरंत उसे अस्पताल लेकर भागा। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि अंदरूनी अंगों में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ है, जिसके लिए तत्काल आपातकालीन सर्जरी करनी पड़ी। सरोजिनी को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

अस्पताल के बिस्तर पर जब सरोजिनी को जिंदगी और मौत से जूझते देखा, तब जाकर तूफानी का झूठा अहंकार टूटा। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसकी अनदेखी, शारीरिक कमजोरी को छुपाने और मारपीट ने ही पूरे परिवार को इस तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा किया था। उसने रोते हुए सरोजिनी से माफी मांगी और अपना इलाज कराने का फैसला किया। मेडिकल जांच में तूफानी की शारीरिक समस्या सामने आई, जिसके बाद उसने करीब 6 महीने तक नियमित इलाज और दवाइयां लीं।

दूसरी ओर, इस घटना के बाद रोहित आत्मग्लानि और अपराधबोध के बोझ तले दब गया। पढ़ाई पूरी होते ही वह हमेशा के लिए गांव लौट गया और उसने उस घर से हमेशा के लिए दूरी बना ली।

सबक:

यह कहानी एक चेतावनी है कि वैवाहिक जीवन में संवाद, सम्मान और एक-दूसरे की जरूरतों को समझना कितना जरूरी है। जब पति या पत्नी अपनी जायज मांग रखते हैं, तो उसे गुस्से या हिंसा से दबाने के बजाय संवेदनशीलता से सुनना चाहिए। अगर कोई चिकित्सीय समस्या हो, तो समाज के डर या झूठे अहंकार को छोड़कर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, ताकि रिश्ते वासना और धोखे के अंधेरे में न भटकें।.

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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