**लड़के ने पुलिस इंस्पेक्टर के साथ किया बड़ा कांड, असली सच जानकर S.P. साहब भी रह गए हैरान…** – News

**लड़के ने पुलिस इंस्पेक्टर के साथ किया बड़ा कांड, असली सच जानकर S.P. साहब भी रह गए हैरान…**

**लड़के ने पुलिस इंस्पेक्टर के साथ किया बड़ा कांड, असली सच जानकर S.P. साहब भी रह गए हैरान…**

लड़के ने पुलिस इंस्पेक्टर के साथ किया बड़ा कांड, असली सच जानकर S.P. साहब भी रह गए हैरान…

.

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपसे एक ऐसी घटना की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो एक छोटे से किसान परिवार की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। यह कहानी मेरठ जिले के पंचली गांव की है, जहां एक साधारण किसान सीताराम अपनी दो एकड़ जमीन पर मेहनत करके परिवार को संभाल रहा था।

सीताराम की पत्नी पांच साल पहले लंबी बीमारी में चल बसी। उसकी मौत के बाद सीताराम अकेला पड़ गया, लेकिन वह कभी हार नहीं माना। वह दिन-रात खेत में काम करता, अपनी दो बेटियों आरजू और गौरी को पढ़ाता और छोटे भाई शंकर की पढ़ाई का ख्याल रखता। आरजू दो साल पहले दसवीं पास कर चुकी थी और अब घर के कामकाज में लगी रहती। गौरी बारहवीं में पढ़ रही थी और शंकर नौवीं में। तीनों बच्चे बहुत होशियार थे, लेकिन जीवन की सच्चाई उन्हें कभी नहीं छू पाती।

जमीन सड़क के किनारे पर होने से पड़ोसियों ने उसे छोड़ दिया था। सभी ने अपनी जमीन बेच दी और अच्छे पैसे कमा लिए। लेकिन सीताराम का मानना था कि यह जमीन उनके पूर्वजों की देन है। वह कभी नहीं बेच सकता था। इस जमीन को संभालकर रखना उनका दायित्व था।

फिर एक दिन सीताराम को लगा कि आरजू अब जवान हो चुकी है। वह सोचने लगा कि आरजू की शादी करनी चाहिए। गांव में लड़का ढूंढने लगा। उसी समय पंचली गांव में एक पुलिस दरोगा सुंदर सिंह रहता था। सुंदर सिंह शराब, मांस और शराब का बड़ा शौकीन था। गांव की खूबसूरत औरतों को देखकर उसकी नियत बदल जाती। जो महिला पसंद आए उसे पैसे देकर अपने बिस्तर तक ले जाता और रात भर बिताता। अगर कोई नहीं मानता तो उसकी रातें रंगीन कर देता।

सुंदर सिंह के पास पैसे थे। गरीबों को ऊंचे ब्याज पर उधार देता, लेकिन ब्याज न लौटाने पर महिलाओं का गला दबा लेता। वह सीताराम की दोनों बेटियों को देखता रहता। एक दिन सुबह पांच बजे आरजू और गौरी पूजा की थाली लेकर मंदिर जा रही थीं। सुंदर सिंह की बैठक के पास से गुजरते ही उसकी नजर गौरी पर पड़ी। गौरी की खूबसूरती देखकर सुंदर सिंह का मन बिगड़ गया। उसने मन में सोचा कि इस छोटी बेटी को किसी भी कीमत पर हासिल करना होगा।

दोपहर को सुंदर सिंह घर लौटा, खाना खाया और सीताराम के घर पहुंच गया। गौरी दरवाजा खोलने गई। सुंदर सिंह ने कहा कि मैं तुम्हारे पिता से मिलना चाहता हूं। गौरी ने कहा कि पिताजी घर में बैठे हैं, लेकिन तुम अंदर आ सकते हो। सुंदर सिंह अंदर गया और सीताराम से बात शुरू की। उसने कहा कि आरजू अब बड़ी हो गई है, उसके हाथ पीले कर दो। सीताराम ने बताया कि उसने एक लड़का रवि देख लिया है, जो बहुत हैंडसम और पढ़ा-लिखा है। सुंदर सिंह ने कहा कि जल्दी शादी कर दो। सीताराम ने कहा कि पैसे नहीं हैं। सुंदर सिंह ने हंसी और कहा कि पैसे मैं उधार दूंगा, लेकिन अपनी जमीन गिरवी रख दो।

सीताराम को मजबूरन मानना पड़ा। उसने जमीन गिरवी रख दी और एक लाख रुपये पा लिए। कुछ दिन बाद आरजू की शादी रवि से हो गई।

तीन महीने बाद, सात मार्च दो हजार छब्बीस को शाम चार बजे गौरी स्कूल से घर लौटी। शंकर भी घर आ गया था। सीताराम चारपाई पर लेटा था। गौरी ने पूछा कि पिताजी, आजकल क्या बात है? सीताराम ने कहा कि मेरी तबीयत खराब है, पशु भूखे हैं। उसने गौरी और शंकर को खेत में चारा काटने भेजा। गौरी ने कहा कि मैं शंकर को लेकर जा रही हूं। दोनों खेत की ओर चल पड़े।

ठीक उसी समय सुंदर सिंह अपनी मोटरसाइकिल लेकर खेतों की ओर जा रहा था। उसकी नजर गौरी पर पड़ी। मन में ख्याल आया कि आज इसकी मदद कर सकता हूं। वह रुक गया और बोला कि तुम दोनों मेरी मोटरसाइकिल पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें खेत छोड़ दूंगा। दोनों ने हंसकर मान लिया। सुंदर सिंह मोटरसाइकिल चलाने लगा। पांच-छह मिनट बाद खेत पहुंच गया। गौरी और शंकर उतर गए।

शंकर खेत में चारा काटने लगा। सुंदर सिंह ने शंकर को पास बुलाया और कहा कि मेरी मोटरसाइकिल का तेल खत्म हो गया है। घर जाकर चाची से पेट्रोल लाओ और जल्दी आ जाना। शंकर ने हामी भरी और गौरी से कहा कि मैं गांव से पेट्रोल लेकर आता हूं।

जैसे ही शंकर थोड़ी दूरी पर पहुंच गया, सुंदर सिंह गौरी के पास आ गया। खेत में दूर तक कोई नहीं था। उसने गौरी के हाथ से दर्ती छीन ली, गर्दन पर रख ली और कहा कि अगर चीखेगी तो गला काट दूंगा। गौरी डर गई लेकिन चीख नहीं पाई। सुंदर सिंह ने कहा कि पास का ट्यूबवेल कमरा है, चलो। गौरी ने हाथ जोड़कर मना कर दिया। लेकिन सुंदर सिंह डराने लगा कि नहीं चली तो गला काट दूंगा।

गौरी को डराया और कमरे में ले गया। दरवाजा बंद किया। गौरी रोती रही, हाथ-पैर जोड़ती रही, लेकिन सुंदर सिंह नहीं माना। वह उसकी इच्छा पूरी करने लगा। गौरी चीखती रही लेकिन कोई नहीं आया। जब सुंदर सिंह का मन भर गया तो उसने गौरी से धमकी दी कि यह बात किसी को बताएगी तो परिवार को मार दूंगा। न पिता को, न भाई को।

गौरी ने अपना काम पूरा होने तक चुप रहकर सह लिया। शंकर पेट्रोल लेकर आया। सुंदर सिंह ने मोटरसाइकिल में पेट्रोल डाला, गौरी से कहा कि चारा काटो, अपना काम शुरू करो। शंकर ने कहा कि अंकल जी, समय नहीं है, बाद में सीख लूंगा। सुंदर सिंह चला गया।

गौरी ने शंकर से यह सब छुपा लिया। उसने सोचा कि अगर बताई तो पुलिस वाला पूरा परिवार खत्म कर देगा। गौरी बहुत परेशान हो गई। वह स्कूल छोड़ने लगी। कई दिनों तक स्कूल नहीं गई। घर में खाना नहीं खाती, रात को नींद नहीं आती।

एक दिन सितारा मार्च को शंकर पिता के साथ खेत गया। सुंदर सिंह भी घर से निकला। बीच रास्ते में दोनों को देख लिया। उसने घर की ओर मुड़कर सीधे गौरी के घर पहुंचा। गौरी दरवाजा खोलने गई। सुंदर सिंह ने जबरदस्ती अंदर घुसकर कहा कि तुमने किसी को नहीं बताया, लेकिन आज भी साथ वक्त गुजारना होगा। गौरी ने रोते हुए मना कर दिया। सुंदर सिंह ने धमकी दी कि कल कब्जा कर लूंगा, खेत पर भी कब्जा करूंगा क्योंकि पिता ने पैसे नहीं लौटाए। गौरी टूट गई।

सुंदर सिंह ने दरवाजा बंद किया, गौरी को कमरे में खींच लिया। फिर से गलत काम शुरू कर दिया। गौरी ने हाथ जोड़े रहे, लेकिन सुंदर सिंह पूरा हुआ तो बोला कि कब्जा नहीं करूंगा, लेकिन मन आएगा तो आएगा।

इस तरह सुंदर सिंह कई बार आकर गौरी के साथ यह काम कर लेता। गौरी कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी थी, लेकिन पिता और भाई याद आते तो रुक जाती।

एक दिन चार अप्रैल को सुबह गौरी अकेली घर पर थी। उसकी सहेली पूजा आई। पूजा ने कहा कि तुम स्कूल छोड़ दिया, घर से बाहर नहीं निकलतीं, आज मेरा जन्मदिन है, चलो मेरे घर। गौरी ने मना कर दिया। लेकिन पूजा दबाव बना रही। अंत में गौरी चली गई। पूजा ने गौरी को अलग कमरे में बिठाकर बार-बार पूछा कि इतनी उदास क्यों हो? गौरी ने पूरी कहानी रोते हुए बता दी।

पूजा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने गौरी से वादा लिया कि कोई नहीं बताएगा। पूजा ने जन्मदिन मनाया, शाम को गौरी को घर छोड़ने निकली। बीच रास्ते सीताराम आ गए। पूजा ने सीताराम से कहा कि चाचा जी, मेरी सहेली गोरी पर बहुत गलत हुआ है। सुंदर सिंह ने कई बार गलत काम किया है। पूजा ने पूरी कहानी सुनाई।

सीताराम और शंकर का गुस्सा आ गया। उन्होंने घर से लाठी और कुल्हाड़ी उठाई। सुंदर सिंह की पत्नी ने बताया कि वह बलदेव की बैठक में शराब पी रहा है। दोनों वहां पहुंचे। सुंदर सिंह शराब में लेटा था। सीताराम ने पहले तीन-चार लाठी उसके सिर पर मारीं। शंकर ने कुल्हाड़ी से कई बार वार किए। सुंदर सिंह के सिर से खून निकलने लगा। शंकर ने सिर धड़ से अलग हो जाने तक वार किए।

लोगों की भीड़ लग गई। एक व्यक्ति सुमेर ने पुलिस को फोन किया। आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची। शव बरामद किया गया। पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। गांव वालों ने बताया कि सीताराम और शंकर ने किया है। तीन घंटे बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

सीताराम ने पुलिस को अपनी पूरी कहानी सुनाई कि सुंदर सिंह ने मेरी बेटी से कई बार गलत काम किया।

दोस्तों, इस घटना में सीताराम और शंकर ने जो किया, क्या वह सही था या गलत? आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं।

यह थी मेरठ जिले की एक ऐसी कहानी जो मेहनत, भाग्य और बदले की सीमाओं को दिखाती है।

 

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles