फोन फटने से हुआ बड़ा हादसा, SP भी रह गए हैरान।
सूरत का खौफनाक हत्याकांड: स्मार्टफोन के लालच में बेटी का अवैध संबंध, पुराने फोन के शक में पिता ने पत्नी और बेटी को जिंदा जलाया
20 अगस्त 2025 को गुजरात के सूरत जिले के पालनपुर इलाके में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। सूमीनाथ सिंह एक गरीब मजदूर था, जो अपनी पत्नी रचना देवी और इकलौती 17 वर्षीय बेटी सोनम के साथ रहता था। सूमीनाथ पास के ही एक निजी प्राथमिक स्कूल में सुरक्षा गार्ड (चौकीदार) का काम करता था। वह सुबह से शाम तक पसीना बहाता, लेकिन महीने के सिर्फ 12,000 से 13,000 रुपये ही कमा पाता था। इतने कम पैसों में परिवार का गुजारा बमुश्किल होता था। रचना अनपढ़ थी और घर के छोटे-मोटे काम करती थी। सोनम ने हाल ही में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था।

एक दिन सूमीनाथ ने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा: “बेटी, तुम्हें कॉलेज जाना चाहिए। पढ़ाई में लापरवाही मत करो। अगर नहीं पढ़ोगी तो आगे चलकर बहुत तकलीफ उठानी पड़ेगी।” सोनम रोते हुए बोली: “पिताजी, मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता। मुझे सिर्फ दोस्तों के साथ घूमना अच्छा लगता है।” लेकिन सूमीनाथ ने दृढ़ता से कहा: “बेटी, मैं तुम्हारी हिफाजत करूंगा। मैं नहीं चाहता कि तुम भी मेरी तरह गरीबी और जिल्लत भरी जिंदगी जियो।”
सोनम का दाखिला घर के पास के ही एक कॉलेज में करवा दिया गया। कॉलेज में एक महीना बीतने के बाद उसने देखा कि उसकी सभी सहेलियों के पास महंगे स्मार्टफोन हैं। सोनम के मन में भी लालच जाग उठा। उसने अपनी मां से जिद करते हुए कहा: “मां, मुझे भी एक स्मार्टफोन चाहिए। कॉलेज में सभी के पास फोन है। अगर मुझे कभी देर भी हो जाए, तो आप मुझे फोन कर सकती हैं, जिससे किसी को चिंता नहीं होगी।” रचना ने हामी भरते हुए कहा: “ठीक है बेटी, तेरे पिताजी के काम से लौटने पर मैं उनसे बात करूंगी।”
शाम करीब 4 बजे जब सूमीनाथ घर लौटा, तो रचना ने कहा: “सुनिए, हमारी बेटी अब कॉलेज जाने लगी है। हमें उसे एक फोन दिलाना ही होगा। भले ही आप मेहनत-मजदूरी करते हैं, लेकिन वह हमारी इकलौती औलाद है, हमें इतना तो करना ही पड़ेगा।” सूमीनाथ ने बेबसी से सिर हिलाते हुए कहा: “रचना, मैं महीने में सिर्फ 12-13 हजार रुपये कमा पाता हूं। मैं नया स्मार्टफोन कहां से लाऊं? ज्यादा से ज्यादा मैं कोई पुराना फोन खरीद सकता हूं।” सोनम ने तुरंत बीच में बोलते हुए कहा: “पिताजी, मुझे बस एक पुराना फोन ही दिला दीजिए। कम से कम मैं जरूरत पड़ने पर बात तो कर सकूंगी।”
उसी रात सूमीनाथ पास की एक छोटी सी मोबाइल दुकान से 3,500 रुपये में एक पुराना सेकंड-हैंड फोन खरीद लाया। उसने फोन लाकर सोनम के हाथों में रख दिया। सोनम खुशी से फूली नहीं समाई। मां-बाप भी खुश थे कि चलो बेटी को थोड़ी सहूलियत मिल गई।
लेकिन अगले चार दिनों तक सोनम दिन-रात उसी फोन में डूबी रही। वह रात भर फोन चार्जिंग पर लगाकर रखती थी। 15 सितंबर 2025 की रात अचानक फोन ने चार्ज होना बंद कर दिया। सोनम ने अपनी मां से कहा: “मां, फोन चार्ज नहीं हो रहा है। मैं इसे पास की दुकान पर ठीक कराने ले जा रही हूं।” सोनम दौड़कर पास ही जतिन नाम के एक अधेड़ उम्र के दुकानदार की मोबाइल शॉप पर पहुंची।
जतिन ने सोनम को घूरते हुए कहा: “नया फोन चाहिए क्या? तेरा बाप गरीब है, तुझे खुद ही कुछ करना पड़ेगा।” सोनम बोली: “मुझे बस यह पुराना फोन ठीक कराना है।” जतिन की नीयत डोल गई और उसने गलत इरादे से कहा: “अगर नया और अच्छा फोन चाहिए, तो इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” स्मार्टफोन के लालच में अंधी हो चुकी सोनम ने बिना सोचे-समझे हामी भर दी।
20 सितंबर की रात करीब 11 बजे सोनम चुपके से घर से निकली। जतिन ने दुकान का शटर खोला और दोनों दुकान के पिछले कमरे में चले गए, जहाँ उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद जतिन ने सोनम के हाथ में एक नया स्मार्टफोन थमाते हुए कहा: “अब से हर रोज यहां आना। मैं तुझे पैसे भी दूंगा और इससे भी बेहतर फोन दूंगा।”
सोनम रात 12:30 बजे घर लौटी। वह जानती थी कि यह रिश्ता गलत और अनैतिक है, लेकिन महंगे फोन के लालच ने उसकी अक्ल पर पर्दा डाल दिया था। अगले तीन दिनों तक यह सिलसिला बेरोकटोक चलता रहा।
24 सितंबर की रात जतिन ने सोनम को फोन करके दुकान पर बुलाया। सोनम रात का खाना खाने के बाद 11 बजे चुपके से घर से निकल गई। जतिन ने उसे अंदर खींच लिया। लेकिन इस बार किस्मत ने धोखा दे दिया। पड़ोस में रहने वाले ईश्वर सिंह ने—जो शराब पीने का आदी था लेकिन उस वक्त पूरे होश में था—सोनम को दुकान के अंदर जाते देख लिया। ईश्वर यह भी जानता था कि जतिन पहले भी रचना (सोनम की मां) को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर चुका था।
ईश्वर तुरंत दौड़कर सूमीनाथ के घर पहुंचा और रात 11:30 बजे दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुलते ही ईश्वर ने हांफते हुए कहा: “सूमीनाथ, तेरी बेटी जतिन के साथ मोबाइल की दुकान में रंगरलियां मना रही है!” सूमीनाथ सन्न रह गया और गुस्से में चिल्लाया: “कहाँ है वो?” ईश्वर बोला: “पहले जाकर अपनी बेटी का कमरा देख ले।” सूमीनाथ दौड़कर सोनम के कमरे में गया, लेकिन कमरा खाली था।
सच्चाई सामने आते ही सूमीनाथ के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह ईश्वर के साथ मोबाइल की दुकान पर पहुंचा और शटर पीटने लगा। जैसे ही जतिन ने दरवाजा खोला, सूमीनाथ ने अंदर सोनम को देखा और उसका खून खौल उठा। उसने जतिन को लहूलुहान होने तक पीटा। इसी बीच ईश्वर ने यह भी उजागर कर दिया कि रचना भी जतिन के संपर्क में रह चुकी थी।
इस खुलासे ने सूमीनाथ को पागलपन की हद तक पहुंचा दिया। उस रात घर लौटकर उसने दोनों को बेरहमी से पीटा—पहले बेटी को उसकी करतूत के लिए, और फिर पत्नी रचना को। आसपास के कई पड़ोसी तमाशा देखते रहे, लेकिन किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। सूमीनाथ अंदर से पूरी तरह टूट चुका था।
2 अक्टूबर 2025 की सुबह, सूमीनाथ ने काम पर जाने का नाटक किया। लेकिन असल में वह बाजार जाकर रस्सी, जहर और 5 लीटर पेट्रोल खरीद लाया। शाम को घर लौटने पर उसने रात के खाने में चुपके से जहर मिला दिया। खाना खाते ही रचना और सोनम दोनों बेहोश होकर फर्श पर गिर पड़ीं।
रात करीब 10 बजे, सूमीनाथ ने उस मोबाइल को चार्ज पर लगाया, पूरे घर में पेट्रोल छिड़का और माचिस जलाकर आग लगा दी। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरे घर को घेर लिया और दोनों मां-बेटी जिंदा जल गईं। सूमीनाथ बाहर निकला, दरवाजे को बाहर से बंद किया और खुद को निर्दोष दिखाने का नाटक करने लगा।
अगली सुबह, पड़ोसी रविकांत ने घर से धुआं और आग की लपटें निकलती देखीं। जब लोग अंदर पहुंचे, तो कमरे में दो जली हुई लाशें और फटा हुआ मोबाइल मिला। रविकांत ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और सूमीनाथ को हिरासत में ले लिया।
शुरुआती पूछताछ में सूमीनाथ ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और कहा: “मोबाइल फटने की वजह से घर में आग लग गई थी। मैं काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था, जब लौटा तो पत्नी और बेटी जल चुकी थीं।”
लेकिन पुलिस को उसकी कहानी पर यकीन नहीं हुआ। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो सूमीनाथ टूट गया। वह घुटनों के बल बैठकर रोने लगा और बोला: “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई… मैंने खुद अपने हाथों से अपनी पत्नी और बेटी को मार डाला। मुझे जीने का कोई हक नहीं है।”
पुलिस ने तुरंत उसका इकबालिया बयान दर्ज कर लिया। सूमीनाथ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, घर को सील कर दिया गया और दोनों शवों का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया गया। अनैतिक गतिविधियों और उकसाने के आरोप में जतिन पर भी कानूनी शिकंजा कसा गया। सूमीनाथ पर हत्या की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
यह दर्दनाक घटना इस बात की गवाह है कि कैसे अनियंत्रित तकनीक और लालच एक हंसते-खेलते परिवार को राख के ढेर में तब्दील कर सकते हैं। सूमीनाथ एक मेहनती पिता था, लेकिन अंधाधुंध शक, धोखे और सामाजिक कलंक के डर ने उसे अपनी ही औलाद का हत्यारा बना दिया।
घटना के दो हफ्ते बाद, पालनपुर गांव में एक पंचायत सभा बुलाई गई, जहां पुलिस अधिकारियों ने माता-पिता को सख्त हिदायत दी: “बच्चों को छोटी उम्र में स्मार्टफोन देने से बचें। उनके फोन और संगति पर नजर रखें और उनसे खुलकर बात करें।”
सूरत की सलाखों के पीछे बैठा सूमीनाथ आज भी अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहा है: “उसने मुझे ऐसा धोखा क्यों दिया? काश मैंने उस रात सब्र से काम लिया होता।” यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि बदलते समाज के लिए एक खौफनाक चेतावनी है।